मिटती दुनिया को भुला दे, अंतर का दिल जला दे। माटी की माया छोड़ के, शिव से नाता जोड़ ले।
संसार का ये खेल है भवर, तृष्णा का हर घूँट है ज़हर। समझ इसे एक भ्रम का मेला, हर राही है यहाँ अकेला। अब हर बंधन तोड़ दे, शिव से नाता जोड़ ले।
देख क्षणभंगुर सब नाते, केवल दुखों की ओर ले जाते। जिनसे थी आस सुख की कभी, वही हर बार आँसू दे जाते। अब हर बंधन तोड़ दे, शिव से नाता जोड़ ले।
अपनों ने ही खेले ऐसे दाँव, दिल पे छोड़ गए गहरे घाव। अब छूट गया हर मिथ्या भाव, मन से मिटे सारे लगाव। अब हर बंधन तोड़ दे, शिव से नाता जोड़ ले।
आज के सपनों का यह जाल, माया पल-पल कर बेहाल। ना इसमें प्यार या कोई सार, हर रिश्ता निकला बस व्यापार। अब हर बंधन तोड़ दे, शिव से नाता जोड़ ले।